Friday, 3 May 2013

दो रास्ते

ज़िन्दगी के रास्ते है दो।
चलो भाई देख के चलो।।

        एक पथ मेम भ्रांति-भ्रांति है,
        दूसरें  में   शांति-शांति है।
कोई सा भी रास्ता चुनो॥
चलो भाई देख के चलो.....

       चमचमा रही जो रही है जो डगर,
       लक्ष्य तक न पहुँचती मगर।
बीच में कहीं न जायें खो॥
चलो भाई देख के चलो.........

        सामने जो भीड़ जा रही,
        सुख के लिये दुख उठा रही।
खिलखिला हँसी भी रही रो॥
चलो भाई देख के चलो........

        प्यास पाले खड़ी कोठियाँ,
         भूख से लड़ पड़ी रोटियाँ।
नींद आए न संतोष को॥
चलो भाई देख के चलो....

       सर्प की चाल सीधी लगे,
       फ़िर भला भाग्य कैसे जगे।
मार्ग सत्यं शिवं ही गहो॥
चलो भाई देख के चलो.....

      कुछ सुगंधित सुमन से खिले,
      रोज़ जिन को चुभन ही मिले।
बाँट फ़िर भी रहे प्यार वो,
चलो भाई देख के चलो......

       है यही राह कल्याण की,
       है यही राह है भगवान की।
राह का दीप बन के जलो॥
चलो भाई देख के चलो........


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